पिरामिड शक्ति

पिरामिड सर्वाधिक टिकाऊ ढाँचा है जो धरती पर सबसे अधिक विश्व-ऊर्जा प्राप्त कर सकता है। जब मिस्र के महान पिरामिडों की तरह पंक्तिबध्द (aligned) तथा 52 डिग्री 51 मिनट के स्वर्णिम कोण को लिए हुए पिरामिड बनाए जाते हैं तो वे सबसे अधिक विश्व ऊर्जा को खींचते हैं। यही कारण है कि वे ब्रह्माण्ड से खींची गई ऊर्जा के अक्षय भण्डार हैं। पुरातन मिस्र वासियों ने इसी सिध्दान्त पर काम करते हुए दस हज़ार वर्ष पूर्व पिरामिड बनाए थे। यह पिरामिड शक्ति विश्व ऊर्जा तथा पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के सम्मिश्रण से प्राप्त की गई थी।

पिरामिड को चारों प्रमुख दिशाओं के अनुसार सीध में रख कर बनाया जाता है। विश्व ऊर्जा पिरामिड के आधार से एक तिहाई ऊँचाई पर   संचित हो जाती है जिसे किंग्स चेम्बर कहा जाता है। इसका एक उदाहरण पिरामिड वैली बेंगलौर में बने मैत्रेय बुद्ध पिरामिड का किंग्स  चेंम्बर है, जिसे वहाँ देखा जा सकता है।

पिरामिड एक ऐसा ज्यामितीय ढाँचा है जिसमें ऊर्जा कई गुणा बढ़ जाती है। जब पिरामिड के अन्दर कोई वस्तु रख दी जाती है तो उसे अपने बारे में संवर्ध्दित सूचना मिलने लगती है। इससे उस वस्तु के तत्वों की क्षमता बढ़ जाती है। उसके भीतर कुछ भी रखा जाए, इससे अन्तर नहीं पड़ता। पिरामिड उन वस्तुओं को वैसा बना देता है जैसा उन्हें होना चाहिए। सब कुछ आदर्श व सम्पूर्ण अवस्था में आ जाता है।

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