" 2020 - शाकाहार जगत् "

बाघ बकरी को खाता है। अतः उसे (भयंकर जानवर) ‘क्रूरमृग’ कहते हैं।
हाथी शाकाहारी है। अतः उसे " साधु जानवर " कहते हैं।
हाथी भयंकर जानवर नहीं है ... और बाघ साधु जानवर नहीं है।
" क्रूर " शब्द के प्रयोग में ही कठिनता दिखाई देती है।
" साधु " शब्द के प्रयोग में ही कोमलता तथा शांति है।
अच्छा ... अब " व्यक्ति"?
व्यक्ति भी यदि मुर्गों तथा बकरियों को खाता है, तो क्रूरमृग ही कहा जाएगा।
यदि व्यक्ति शस्याहारी है, तो साधु ही है।
मांस खाने वाले सारे मानव भी दि्वपाद क्रूरमृग ही हैं।
शस्याहारी मानव सब संस्कारपूर्ण साधु मानव हैं।
मांसाहारी मानव सब जंगली मनुष्य हैं।
सभी शस्याहारी व्यक्ति " मानवता से प्रकाशित व्यक्ति " हैं
यह पृथ्वी आपकी है।
सभी मांसाहारी अब शाकाहारी हो जावें;
यह पृथ्वी आपकी है।
सारे जंगली व्यक्ति अब मानवता के देवता बन जावें;
इस पृथ्वी पर
वर्ष 2020 तक शाकाहार जगत् की स्थापना ज़रूर होगी।
जय शाकाहार जगत्! जय जय शाकाहार जगत्!!

ध्यानांध्रप्रदेश, जनवरी 2011

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