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ध्यान क्या है ?

यदि एक सरल वाक्य में कहें तो ध्यान चित्त की विक्षुब्ध तरंगों के ठहर जाने या पूर्णतया शांत हो जाने का नाम है | यह एक ऐसी अवस्था है जहाँ मन हर प्रकार के विचारों से रहित हो जाता है तथा हमें एक ऐसे प्रवेश द्वार की ओर ले जाता है जहाँ हम वैश्विक ऊर्जा से घिर जाते हैं।


ध्यान का अर्थ है अपने मन को रिक्त या शून्य बना लेना। एक बार मन शून्य हो गया तो हमारे भीतर अत्यधिक वैश्विक ऊर्जा व चतुर्दिक व्याप्त सूचनाओं को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। इसके प्रभाव स्वरूप हमें सम्पुर्ण स्वास्थ्य मिलता है तथा विचार प्रक्रिया में समग्र स्पष्टता की प्राप्ति होती है जो हमें एक आनन्दमय जीवन प्रदान करती है। ध्यान अध्यात्मशास्त्र के साम्राज्य तक पहुँचने का सिंहद्वार है और हमारे आत्मिक विकास में सहायक होता है। नियमित व गहन अभ्यास से हम चेतना के उच्चतर स्तरों पर पहुँच कर स्वाभाविक रूप से आनन्द की अवस्था को प्राप्त कर लेते हैं। कोई भी व्यक्ति ध्यान कर सकता है। इसके लिए किसी धार्मिक अथवा रहस्यात्मक दर्शन को थामने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है। 

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