ध्यान के बहुविध लाभ हैं

  1. समस्त शारीरिक व्याधियों का पूर्णतया उपचार संभव हो जाता है|
  2. स्मरण शक्ति का विकास होता है|
  3. अनुपयोगी आदतें स्वयमेव समाप्त हो जाती हैं|
  4. मन सदैव शांत व प्रसन्न रहता है|
  5. हम सभी कार्य अधिक कुशलतापूर्वक कर पाते हैं|
  6. नींद के लिए कम समय की आवश्यकता पड़ती है|
  7. सम्बंधों में अधिक गुणवत्ता व तृप्ति का भाव आता है|
  8. विचार शक्ति में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है|
  9. उचित अनुचित में भेद कर पाने की क्षमता बढ़ जाती है|
  10. जीवन का ध्येय बेहतर समझ आने लगता है|

स्वास्थ्य लाभ – समस्त शारीरिक व्याधियाँ मानसिक चिंताओं के फलस्वरूप जन्म लेती हैं सभी मानसिक चिंताएँ बौद्धिक अपरिपक्वता के कारण होती हैं| यह बौद्धिक अपरिपक्वता आध्यात्मिक – ऊर्जा व समझदारी की कमी के कारण पैदा होती है| रोग मूलतः हमारे पूर्वजन्मों के  ऋणात्मक अथवा नकारात्मक कर्मों के कारण पैदा होते हैं| जब तक नकारात्मक कर्म निष्प्रभाव नहीं हो जाते, यह रोग भी हमें छोड़ कर नहीं जाते, इन कर्मों के निराकरण के लिए कोई भी दवा काम नहीं करती|

ध्यान के द्वारा हम प्रचुर मात्रा में आध्यात्मिक ऊर्जा व समझदारी प्राप्त कर लेते हैं| तब हमारी बुद्धि भी परिपक्व होने लगती है| धीरे धीरे सभी मानसिक चिंताएँ समाप्त हो जाती हैं और सभी व्याधियाँ भी अदृश्य होने लगती हैं| ध्यान ही सभी रोगों के उपचार का एक मात्र उपाय है|

स्मरण शक्ति में बढ़ोतरी – ध्यान द्वारा प्राप्त प्रचुर आध्यात्मिक ऊर्जा हमारे मस्तिष्क को अधिक कुशलतापूर्वक काम करने में मदद करती है| हमारा मस्तिष्क अपनी अधिकतम क्षमता के साथ काम कर पाता है| ध्यान द्वारा स्मरण शक्ति में अतिशय वृद्धि होती है| अतएव विद्यार्थियों के लिए तो ध्यान बेहद ज़रूरी है – चाहे वे स्कूल में पढ़ते हों या यूनिवर्सिटी में|

अनुपयोगी आदतों का अंत - हम सभी में कोई न कोई बेकार आदत होती ही है जैसे आवश्यकता से अधिक खाना, सोना अथवा बातें करना, मदिरा पान करना आदि| ध्यान द्वारा प्राप्त आध्यात्मिक ऊर्जा व समझदारी के कारण ये सभी बेकार की आदतें स्वाभाविक रूप से खुद ही मरण को प्राप्त हो जाती हैं|

आनंदयुक्त मन – जीवन में सभी को कभी न कभी पराजय, अपमान व पीड़ा का अनुभव होता ही है| आध्यात्मिक ऊर्जा व ज्ञान से समृद्ध व्यक्ति का जीवन हमेशा शान्तिमय व आनंदमय रहता है चाहे उसके जीवन में पराजय, अपमान व पीड़ा आती रहे|

कार्यकुशलता में बढ़ोतरी – अत्यधिक आध्यात्मिक ऊर्जा व भरपूर आध्यात्मिक ज्ञान होने के कारण व्यक्ति अपने सभी काम, चाहे वे शाररिक हों अथवा मानसिक, अधिक कार्य कुशलता व दक्षता के साथ कर पाता है|

नींद के लिए कम समय की आवश्यकता – ध्यान के द्वारा प्रचुर मात्रा में आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है जबकि नींद द्वारा हमें उसका एक छोटा सा अंश ही मिल पाता है| आधा घंटा यदि गहन ध्यान किया जाये तो उससे मिलनेवाली ऊर्जा छः घंटे की गहरी नींद से प्राप्त होने वाली ऊर्जा के बराबर होती है| इससे शरीर को उतना ही विश्राम व मन को उतनी ही शक्ति मिल जाती है|

गुणात्मक सम्बंध – आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता का अभाव ही ऐसा एक मात्र कारण है जिसके फलस्वरूप हमारे पारस्परिक सम्बंध इतने अधिक अपरिपूरित (unfulfilling) व गुणात्मकता रहित (uniqualitative) हो जाते हैं|

विचार शक्ति – विचारों को अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है| अशांत मन में उठे विचारों में शक्ति होती ही नहीं| इस लिए वे लक्ष्य तक पहुँच नहीं पाते| जिस समय मन शांत अवस्था में होता है, विचार भी शक्ति पा लेते हैं और हमारे सभी संकल्प तुरंत साकार हो जाते हैं|

उचित – अनुचित का विवेक – आध्यात्मिक रूप से परिपक्व व्यक्ति के जीवन में कभी दुविधा नहीं रहती, वह सदैव सही निर्णय ही लेता है|

जीवन का ध्येय – हम सभी एक मकसद से दुनिया में जन्म लेते हैं| हमारा एक स्पष्ट लक्ष्य होता है| एक जीवन का प्रारूप हमारे सामने होता है और एक जीवन योजना होती है| इस बात को आध्यात्मिक रूप से परिपक्व व्यक्ति ही समझ सकता है और अपने विशिष्ट लक्ष्य व जीवन – योजना के प्रति सजग रह सकता है|

पत्रीजी कहते हैं कि ध्यान के दौरान आत्मा आध्यात्मिक अज्ञान के अपने ककून को तोड़कर बाहर निकल आती है और अधिक ध्यान करने पर नए नए अनुभव होने लगते हैं और इस ब्रह्माण्ड की असीम सच्चाई की समझ आने लगती है| यही है ‘जागृति’, यही है ‘ज्ञानोदय’ |

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