ध्यान के दौरान होने वाले अनुभव

आरम्भ में अपने ध्यान की गहराई तथा निजी आवश्यकताओं के अनुरूप ही हमें विविध प्रकार के अनुभव होते हैं। उदाहरण के लिए, एक नए ध्यानी को निम्नांकित अनुभवों में से कोई एक या एकाधिक अनुभव हो सकते हैं :

  1. अपने शरीर में हल्केपन या भारहीनता की अनुभूति होना मानो शरीर है ही नहीं।
  2. सिर अथवा शरीर के किसी अन्य भाग में भारीपन की अनुभूति होना।
  3. किसी किसी को रंग दिखाई देना, एक अथवा अनेक रंग।
  4. पीठ के निचले भाग में हल्के से लेकर तेज़ दर्द का होना।
  5. अपने अन्दर ऐसा अनुभव होना जैसे हम गोल - गोल घूम रहे हैं।
  6. किसी किसी को ऐसा लगना जैसे वह हवा में तैर रहा है या पक्षियों की तरह उड़ रहा है।
  7. प्राकृतिक दृश्यों, पूजा स्थलों, देवी देवताओं या गुरुओं के रूप स्पष्ट दिखाई देना। इसे हम दिव्य चक्षु द्वारा दिव्यदर्शन होना कहते हैं।
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